Monday, July 11, 2016

"मन जीता जग जीता "


ये कहा जाता है क़ि हमारा मन एक बन्दर के समान है जिसने अहँकार का ज़हर पी लिया है और जिसे अज्ञानता के बिच्छू ने काट लिया है।  इसको काबू में करने का पहला तरीका है कि इस पर ध्यान दें कि ये कैसे एक जगह से दूसरी जगह कूदता  है। एक बार वह पिछले कर्मों पर अफ़सोस करता है तो कभी भविष्य के प्रति चिंतित रहता है ।   कभी यह इंग्लैंड में होता है तो कभी टिम्बकटू में।  जब हम इसपर ध्यान देंगे कि ये क्या सोच रहा है और कहाँ जा रहा है तो यह थोड़ा शांत होगा।


दूसरा चरण है अपने श्वास पर  ध्यान केंद्रित करना।  श्वास को नियंत्रित कर, हम "प्राण " जो जीवन-शक्ति है उसको नियंत्रित कर सकते हैं।  तरीका बेहद आसान है। श्वास  लेते समय "सो " का उच्चारण करें और छोड़ते वक़्त "हं  " का। इसे "सोऽहं " ध्यान कहते हैं। कुछ  मिनट करने के  बाद  आपकी    श्वास बहुत ही शांत हो जाएगी  और सुचारू रूप से चलने लगेगी  । आपका ध्यान आपकी साँसों पर केंद्रित हो जाएगा और मन बिलकुल शांत।
हमारी सोच किस पर निर्भर करती है ? हमारे मस्तिष्क में क्रेनियल फ्लूइड होता है जिसमें मछली की तरह, हमारे विचार तैरते रहते हैं। हमारे विचारों की गुणवत्ता हमारे क्रेनियल फ्लूइड के स्तर पर निर्भर करती है।  अगर तालाब का पानी प्रदूषित है तो मछलियाँ सड़ जाती हैं और अगर मछलियाँ सड़ जाती हैं तो पानी प्रदूषित हो जाता है। उसी तरह जब क्रेनियल फ्लूइड का स्तर ख़राब होगा तो हमारे विचार दूषित होंगे और अगर हमारे विचार दूषित हैं तो फ्लूइड का स्तर ख़राब होगा।  इस फ्लूइड का स्तर निर्भर करता है हमारे विचार से, पोषण से, व्यायाम से, आराम से और वातावरण से।
विचार : हर विचार के दो भाग होते हैं, तथ्य और भावना। जब हम भावना को तथ्य के साथ जोड़ देते हैं तो हमारे  विचार सकारात्मक या नकारात्मक हो जाते  हैं ।  मान लीजिये कि  आपकी  किसे से झड़प हो गयी और उसने आपको गाली दे दी।  यह तथ्य है की उसने आपको गाली दी है ।  पर, अब आपके पास दो विकल्प हैं।  आप या तो बदले की भावना को चुनकर उसको वापस गाली दें या  क्षमा की भावना से उसे माफ़ कर दें।  इसलिए अपनी भावनाओं का चुनाव सोच समझ कर करें जिससे की आपके विचार हमेशा सकारात्मक हों। किसी भी परिस्थिति में हम किस तरह की प्रतिक्रिया करें उसका चुनाव भी हमारे वष में होता है।
पोषण : हमारे पोषण का प्रभाव हमारे क्रेनियल फ्लूइड पर पड़ता है।  किसी नशे में धुत्त व्यक्ति को देखा होगा कि किस तरह वो मानसिक संतुलन खो बैठता है। सात्विक भोजन, ताज़े फल, सब्जियाँ,दूध आदि क्रेनियल फ्लूइड की गुणवत्ता बढ़ाते हैं जिससे सकारात्मक विचार पैदा होते हैं और मन शांत रहता है।  इसके विपरीत मांसाहारी और मसालेदार भोजन प्रतिकूल प्रभाव डालते  हैं ।
व्यायायम : जब हम व्यायाम करते हैं तो हमारे शरीर में कुछ लाभदायी केमिकल्स  पैदा होते हैं और हानिकारक टॉक्सिन्स नष्ट होते हैं। सेरटोनिन और डोपामाइन जैसे  लाभप्रद चेमिकल्स न सिर्फ क्रेनियल फ्लूइड की गुणवत्ता को बढ़ाते हैं परन्तु तनाव घटा कर हमें सुखद अनुभव प्रदान करते हैं।  अगर आप तनावग्रस्त हैं तो जिम जाएं और एक घंटा व्यायाम करें या टहलने के लिए जाएं, आपको अपने तनाव के स्तर में बदलाव मिलेगा।  ३० मिनट का रोज़ व्यायाम आपके तनाव को हमेशा के लिए ख़त्म कर देगा और बाकि बीमारियों से भी आपको छुटकारा मिलेगा।
आराम : किसी भी मशीन की तरह मनुष्य को भी आराम की जरुरत होती है। बिना आराम और पूरी नींद के आदमी चिड़चिड़ा हो जाता है। अाराम के बिना, लगातार देर रात तक जागने से और गहरी नींद नहीं मिलने से क्रेनियल फ्लूइड की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। जिन लोगों को नींद की शिकायत है उन्हें चाहिए कि वे शव-आसन या योग-निंद्रा करें।
वातावरण : हमारे स्वास्थय  लिए जैसे  धूप  और स्वच्छ  वायु आवयश्क है वैसे ही हमारे मानसिक स्वास्थय के लिए सही भावनात्मक वातावरण का भी होना जरुरी है। हम रोज़ कैसे लोगों से मिलते है कैसे लोगों के साथ उठते- बैठते हैं उसका भी असर हमारे मन पर होता है। ये ज़रूरी है कि हम सकारात्मक लोगों से मिलें और नकारात्मक लोगों से दूरी बनाये रखें।
पर इन सबसे ज्यादा क्रेनियल फ्लूइड का स्तर  निर्भर करता है हमारी  सोच पर। ऊपर बताए गए तरीके से हम अपने विचारों के द्रष्टा बन जाएंगे और धीरे-धीरे ये मन जिसे बन्दर कहा गया है वो हमारे काबू में हो जाएगा। फिर एक पालतू पशु की भाँती हम जो इसे आदेश देंगे वह इस आदेश का पालन करेगा  और जिस सफलता की बुलंदियों पर हम जाना चाहें वहां ले जाएगा।

मनीश कुमार भारतीय वायु सेना में पॉयलट रह चुके हैं। वह  प्रेरणादायी  पुस्तक " बी योर ओन पायलट " के लेखक हैं और एक प्रेरणात्मक वक्ता भी। 
 

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