एक बार एक व्यक्ति ने एक सोने का खान ख़रीदा। उसने वहां हज़ार फ़ीट ख़ुदाई करवाई। कुछ नहीं मिला। दो हज़ार फ़ीट खुदवाया। फिर भी कुछ नहीं। तीन हज़ार पर भी कुछ नहीं मिला। हताश होकर उसने वह खान और सारी मशीनें सस्ते दाम में किसी और को बेच दी। अगले व्यक्ति ने केवल तीन फ़ीट खुदाई की और उसे सोने का भंडार मिला। हम लोगों लोगों के साथ भी कभी न कभी ऐसा हुआ है। अगर हम थोड़ी सी मेहनत और करते तो शायद ज़्यादा नम्बर आते। हम शायद किसी अच्छी नौकरी में होते या हमारा बिज़नेस फ़ेल नहीं होता।
आख़िरी चढ़ाई सबसे कठिन :
आप किसी भी पर्वतारोही से पूछ लें। वह ये बताएंगे कि आख़िरी चढ़ाई ही सबसे कठिन होती है और ज्यादातर पर्वतारोही वहीं हार मान लेते हैं। हमारी ज़िन्दगी में भी ऐसा ही होता है। हम सफलता की कगार पर आ कर हार मान जाते हैं। चाहे वो हमारा अगला प्रोमोशन हो, हमारा स्वास्थ्य हो या हमारे रिश्ते हों। हम उन्हें पाने के लिए या सुधारने के लिए थोड़ी सी कोशिश करते हैं, फ़िर हताश हो जाते हैं। नतिचतन हमसे कम समर्थ लोग हमसे आगे निकल जाते हैं, हमारा स्वास्थ्य बिगड़ जाता है या हमारे रिश्ते बिख़र जाते हैं।
असफलता अस्थायी है :
एक
सफल और असफल व्यक्ति में फ़र्क बस इतना है कि सफल व्यक्ति ने हार का इतनी
बार सामना किया है जितनी बार असफल व्यक्ति ने कोशिश भी नहीं की है। असफलता
एक अस्थायी आयाम है। मान लो आप 12 वी. क्लास में हो और आपका लक्ष्य किसी
बड़ी कंपनी में आई टी आफिसर बनना है। अगर आप आई आई टी पास करने में सफल
नहीं हो पाते तो यह एक अस्थायी असफलता है। आप किसी और इंजीनियरिंग कॉलेज से
भी पढ़ कर अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हो। निश्चित और महान लक्ष्य् :
सफल
होने के लिए सबसे ज़रूरी है कि हमारे पास एक निश्चित और महान लक्ष्य हो।
निश्चित लक्ष्य हमारे कार्यों को सुनियोजित करता है। लक्ष्य जितना महान
होगा असफलता से उतनी ही बार सामना होगा। पर महान लक्ष्य असफलता के क्षणों
में हमें नई ऊर्जा और विश्वास से भरता है। किसी महान लक्ष्य के बिना
ज़िन्दगी अधूरी है। जीने का मज़ा तो तब है जब हम विपरीत परिस्तिथितों का
सामना कर रोज़ अपने लक्ष्य के प्रति अग्रसर हों। शांत समुद्र के किनारे से
तो कोई भी पथ्थर चुन कर ला सकता है पर तूफ़ानी लहरों से जूझ कर मोती लाने
वाला ही सफल होता है।
सफलता पक्की है :
इससे
पहले कि आप सफल हो आपके हौसलों की कई बार आजमाइश की जाएगी। आपके इरादों को
परखा जाएगा। आपके विश्वास के नींव की मजबूती नापी जाएगी। अगर आप मन में
ठान लें कि जब तक आपको सफलता नहीं मिलेगी तब तक आप हार नहीं मानेंगे
चाहे आपको कितनी भी कठिनाइयों का सामना क्यूँ नहीं करना पड़े तो जल्द ही
सफलता आपके कदम चूमेगी।
मनीष कुमार भारतीय वायु सेना में पॉयलट रह चुके हैं। वह प्रेरणादायी
पुस्तक " बी योर ओन पायलट " के लेखक हैं और एक प्रेरक वक्ता भी।

No comments:
Post a Comment